8th CPC Latest Update: 8वें सेंट्रल पे कमीशन को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच इन दिनों जबरदस्त हलचल है। पिछले साल जनवरी में जब केंद्र सरकार ने 8वें पे कमीशन बनाने का ऐलान किया था, तभी से कर्मचारी संगठनों ने अपनी मांगों की लिस्ट तैयार करनी शुरू कर दी थी। अब जब कमीशन ने दिल्ली के जनपथ स्थित चंद्रलोक बिल्डिंग में अपना दफ्तर भी शुरू कर लिया है और सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज रंजना प्रकाश देसाई को इसकी चेयरमैन बनाया गया है तो कर्मचारी संगठनों की गतिविधियां और तेज हो गई हैं। इस बार सबसे ज्यादा जिस मांग पर बात हो रही है वो है फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस यानी FMA को 1,000 रुपये प्रति महीने से बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रति महीने करने का प्रस्ताव। यह मांग खासतौर पर उन कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए है जो सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम यानी CGHS के नेटवर्क से बाहर हैं।
ToR में मांगें नहीं मिली जगह, नाराजगी बढ़ी
नवंबर में जब केंद्र ने 8वें पे कमीशन के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस जारी किए थे तो नेशनल काउंसिल जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी यानी NC-JCM के स्टाफ साइड को पहले सुझाव देने का मौका दिया गया था। मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस ने इनसे लिखित सुझाव भी मांगे लेकिन स्टाफ साइड का कहना है कि उनकी कई जरूरी और बड़ी मांगें आखिरी ToR में शामिल नहीं हो पाईं। फिटमेंट फैक्टर पर कोई साफ बात नहीं हुई, ओल्ड पेंशन स्कीम की बहाली का मसला अधर में है और मेडिकल सुविधाओं पर भी कोई ठोस जिक्र नहीं आया। इसी नाराजगी के चलते अब कर्मचारी संगठन मांगों की एक मजबूत चार्टर तैयार करने में जुटे हैं।
ड्राफ्टिंग कमेटी की बैठक में बना खाका
25 फरवरी से राजधानी दिल्ली में NC-JCM की ड्राफ्टिंग कमेटी की बैठक शुरू हुई जो करीब एक हफ्ते तक चली। इस बैठक में लगभग 1 करोड़ केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स से जुड़ी तमाम मांगों को एक ड्राफ्ट में समेटने का काम हुआ। FMA में बढ़ोतरी के अलावा फिटमेंट फैक्टर और पेंशन से जुड़े मुद्दे भी इस ड्राफ्ट में प्रमुखता से शामिल किए गए हैं। इस ड्राफ्ट को ही आगे 8वें पे कमीशन के सामने रखा जाएगा।
FMA पर सबसे बड़ा प्रस्ताव
- नॉन-CGHS इलाकों में मौजूदा FMA सिर्फ 1,000 रुपये प्रति महीना है
- कर्मचारी संगठनों ने इसे बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रति महीना करने की मांग रखी है
- यह मांग खासतौर पर गांव और दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले पेंशनर्स के लिए है
- CGHS नेटवर्क से बाहर के कर्मचारियों को मेडिकल खर्च खुद उठाना पड़ता है
- यूनियनों का तर्क है कि मेडिकल महंगाई के मुकाबले 1,000 रुपये बेहद कम रकम है
कमीशन का दफ्तर शुरू, कामकाज का संकेत
जनपथ की चंद्रलोक बिल्डिंग में 8वें पे कमीशन का दफ्तर अब तैयार हो चुका है। चेयरमैन रंजना प्रकाश देसाई के साथ कमीशन के बाकी सदस्य भी अपनी भूमिकाओं में आने लगे हैं। कर्मचारी संगठन इसे इस बात का संकेत मान रहे हैं कि अब कमीशन का असली काम जल्द शुरू होगा और मांगों की चार्टर सौंपने का सही वक्त आ गया है।
फिटमेंट फैक्टर और OPS पर भी जोर
FMA के अलावा कर्मचारी संगठनों की दो और बड़ी मांगें हैं जो लगातार चर्चा में हैं। पहली है फिटमेंट फैक्टर पर साफ और ऊंचा आंकड़ा। 7वें पे कमीशन में फिटमेंट फैक्टर 2.57 था और इस बार संगठन इससे काफी ज्यादा की उम्मीद लगाए हुए हैं। दूसरी बड़ी मांग ओल्ड पेंशन स्कीम यानी OPS की बहाली की है जिसे ToR में शामिल न किए जाने पर खासी नाराजगी है।अब सारी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि 8वां पे कमीशन कब से बाकायदा सुनवाई शुरू करता है और कर्मचारी संगठनों को अपनी मांगें रखने का मौका कब मिलता है। FMA को 1,000 से 20,000 रुपये तक बढ़ाने जैसा प्रस्ताव अगर कमीशन ने मान लिया तो नॉन-CGHS इलाकों में रहने वाले पेंशनर्स को बड़ी राहत मिलेगी। आने वाले कुछ महीनों में यह तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।





