20-25 साल से पढ़ा रहे शिक्षकों को टीईटी से छूट पर संसद से बड़ा अपडेट Teacher TET News

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Teacher TET News: राज्यसभा में हाल ही में टीईटी को लेकर एक अहम मुद्दा उठाया गया है। भाजपा के एक सदस्य ने कहा है कि जो शिक्षक पिछले 20–25 साल से लगातार पढ़ा रहे हैं, उन्हें टीईटी अनिवार्यता से राहत दी जानी चाहिए। उनका कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों पर यह नियम अतिरिक्त दबाव बना रहा है। बता दें कि टीईटी कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए जरूरी माना जाता है। वहीं इस विषय को लेकर अब संसद में चर्चा शुरू हो गई है और अनुभवी शिक्षकों की स्थिति पर ध्यान देने की बात कही जा रही है। कई राज्यों में ऐसे शिक्षक हैं जो लंबे समय से पढ़ा रहे हैं और अब उन्हें इस नियम को लेकर चिंता हो रही है।

संसद में उठा अनुभवी शिक्षकों का मामला

राज्यसभा में भाजपा सदस्य धनंजय भीमराव महाडिक ने विशेष उल्लेख के जरिए यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का अधिकार कानून 2009 के तहत कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी जरूरी की गई थी। इस नियम का उद्देश्य स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है, लेकिन कई ऐसे शिक्षक भी इससे प्रभावित हो रहे हैं जो लंबे समय से स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। उन्होंने बताया कि देश के अलग-अलग राज्यों में ऐसे हजारों शिक्षक हैं जो 20 से 25 साल से लगातार अध्यापन का काम कर रहे हैं और अब उनके सामने टीईटी पास करने की शर्त खड़ी हो गई है।

लंबे समय से पढ़ा रहे शिक्षकों की चिंता

सांसद ने कहा कि इस नियम के कारण कई वरिष्ठ शिक्षकों के बीच चिंता का माहौल बन गया है। जो शिक्षक वर्षों से सेवा दे रहे हैं, उन्हें अब नौकरी और सेवा सुरक्षा को लेकर चिंता होने लगी है। उनका कहना है कि इतने लंबे समय तक पढ़ाने के बाद अगर किसी शिक्षक को फिर से परीक्षा देनी पड़े तो यह उनके लिए मानसिक दबाव की स्थिति पैदा करता है। उन्होंने यह भी कहा कि इन शिक्षकों ने अपने अनुभव से हजारों छात्रों को पढ़ाया है और शिक्षा व्यवस्था में उनकी अहम भूमिका रही है, इसलिए उनके अनुभव को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

केंद्र सरकार से राहत देने की मांग

राज्यसभा में उठाए गए इस मुद्दे के साथ केंद्र सरकार से आग्रह किया गया है कि जो शिक्षक 20 से 25 वर्षों तक लगातार सेवा दे चुके हैं, उन्हें टीईटी की अनिवार्यता से छूट दी जाए। सांसद का कहना है कि इससे उन शिक्षकों को राहत मिलेगी जो लंबे समय से स्कूलों में पढ़ा रहे हैं और जिनका अनुभव शिक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि अनुभव भी शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ी ताकत होता है और इसे ध्यान में रखते हुए वरिष्ठ शिक्षकों के लिए अलग व्यवस्था पर विचार किया जाना चाहिए। वहीं उन्होंने यह भी कहा कि अगर इस विषय पर गंभीरता से विचार किया जाता है तो इससे हजारों शिक्षकों को राहत मिल सकती है और शिक्षा व्यवस्था में लंबे समय से काम कर रहे शिक्षकों का मनोबल भी बना रहेगा।

क्या है सुप्रीम कोर्ट का आदेश

टीईटी को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी पहले अपनी बात साफ कर चुका है। कोर्ट ने कहा था कि कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी जरूरी है क्योंकि इससे स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता सुनिश्चित होती है। कोर्ट ने यह भी माना कि शिक्षा व्यवस्था में योग्य और प्रशिक्षित शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। वहीं इस आदेश के बाद कई राज्यों में टीईटी को लेकर नियम सख्ती से लागू किए गए। हालांकि अब वरिष्ठ और लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को लेकर राहत देने की मांग उठने के बाद इस विषय पर फिर चर्चा शुरू हो गई है।

शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा बड़ा मुद्दा

यह मामला केवल कुछ शिक्षकों तक सीमित नहीं है बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है। देशभर में लाखों शिक्षक स्कूलों में पढ़ा रहे हैं और छात्रों की पढ़ाई में उनकी अहम भूमिका होती है। ऐसे में लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के सामने आने वाली समस्याओं को लेकर चर्चा होना जरूरी माना जा रहा है। फिलहाल यह मुद्दा संसद में उठाया गया है और अब केंद्र सरकार के फैसले का इंतजार किया जा रहा है, जिससे यह साफ हो सकेगा कि वरिष्ठ शिक्षकों को टीईटी से राहत मिलेगी या नहीं।

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