Equal Work Equal Pay Supreme Court Order:सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के करीब 10 हजार होमगार्ड जवानों को बड़ी राहत देने वाला फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि जब काम एक जैसा है तो वेतन भी बराबर मिलना चाहिए। इसी आधार पर अदालत ने राज्य सरकार को होमगार्ड जवानों को पुलिसकर्मियों के समान वेतन और सुविधाएं देने का निर्देश दिया है।
साथ ही सरकार की तरफ से दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) को भी खारिज कर दिया गया है और तीन महीने के भीतर आदेश लागू करने को कहा गया है। लंबे समय से होमगार्ड जवान समान वेतन की मांग कर रहे थे और मामला कई साल से अदालत में चल रहा था। अब सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद उम्मीद की जा रही है कि हजारों होमगार्ड जवानों को सीधा फायदा मिलेगा और उनकी आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने दिया साफ संदेश
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ‘समान काम समान वेतन’ का सिद्धांत लागू होना चाहिए। अदालत ने माना कि कई जगहों पर होमगार्ड जवान वही जिम्मेदारियां निभाते हैं जो पुलिसकर्मी निभाते हैं, फिर भी उन्हें कम वेतन मिलता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि होमगार्ड जवानों को भी पुलिसकर्मियों के बराबर वेतन और अन्य सुविधाएं दी जाएं। वहीं राज्य सरकार ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी, लेकिन कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया और हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।
2022 में शुरू हुआ था पूरा मामला
दरअसल यह मामला साल 2022 में शुरू हुआ था जब बिलासपुर जिले में काम कर रहे कुछ होमगार्ड जवानों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। इन जवानों का कहना था कि वे कानून व्यवस्था बनाए रखने, सुरक्षा ड्यूटी और अन्य कई जिम्मेदारियों में पुलिस के साथ काम करते हैं। इसके बावजूद उन्हें पुलिसकर्मियों के मुकाबले काफी कम वेतन मिलता है। इसी वजह से उन्होंने अदालत से मांग की थी कि उन्हें भी पुलिस के समान वेतनमान दिया जाए। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने होमगार्ड जवानों के पक्ष में फैसला दिया था।
हाई कोर्ट के आदेश पर नहीं हुआ था अमल
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा था कि होमगार्ड जवानों को समान काम के बदले समान वेतन मिलना चाहिए और राज्य सरकार को इस दिशा में जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए थे। लेकिन काफी समय गुजरने के बाद भी इस आदेश को लागू नहीं किया गया। सरकार ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी। वहीं लंबे समय तक आदेश लागू न होने पर दो होमगार्ड जवानों ने अदालत में अवमानना याचिका भी दाखिल की थी। इसके बाद यह मामला फिर से चर्चा में आया और अदालत में इस पर दोबारा सुनवाई शुरू हुई, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला सामने आया।
तीन महीने के अंदर करना होगा पालन
अब सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की एसएलपी खारिज करते हुए साफ कर दिया है कि हाई कोर्ट का फैसला सही है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि तीन महीने के भीतर इस आदेश को लागू किया जाए और होमगार्ड जवानों को पुलिसकर्मियों के बराबर वेतन और सुविधाएं दी जाएं। फिलहाल इस फैसले के बाद छत्तीसगढ़ के हजारों होमगार्ड जवानों में खुशी का माहौल है, क्योंकि लंबे समय से वे समान वेतन की मांग कर रहे थे। वहीं माना जा रहा है कि यह फैसला दूसरे राज्यों के होमगार्ड जवानों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है।
यूपी और बिहार के होमगार्ड में भी जगी उम्मीद
बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे बड़े राज्यों में भी बड़ी संख्या में होमगार्ड जवान तैनात हैं जो लंबे समय से बेहतर वेतन और सुविधाओं की मांग करते रहे हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद इन राज्यों के होमगार्ड जवानों में भी उम्मीद जगी है कि उन्हें भी आने वाले समय में राहत मिल सकती है। हालांकि फिलहाल यह फैसला छत्तीसगढ़ से जुड़े मामले में आया है, लेकिन माना जा रहा है कि अगर दूसरे राज्यों में भी इसी आधार पर याचिकाएं दायर होती हैं तो अदालत इस फैसले को उदाहरण के तौर पर देख सकती है।







